August 16, 2022

बिहार विधानसभा में श्रेयसी सिंह ने धान खरीद में गड़बड़ी को लेकर पूछा सवाल, मंत्री बोले- जमुई के किसानों को पूरी राशि नहीं मिलने की होगी जांच

बिहार विधानसभा में गुरुवार को जमुई से विधायक श्रेयसी सिंह के प्रश्न के जवाब में कृषि मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि धान की खरीद होने पर किसानों को रसीद दी जाती है और 48 घंटे में भुगतान हो जाता है। श्रेयसी सिंह ने कहा कि वह रसीद कच्चा है और किसानों को पूरी राशि नहीं मिल पा रही है। इस पर राजद के आलोक कुमार मेहता ने कहा कि यह पूरे बिहार का मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए। टोकाटाकी के बीच मंत्री ने कहा कि वे जमुई जिले की जांच कराएंगे।

इसके बाद कृषि मंत्री अमरेन्द्र सिंह ने कहा है कि राज्य के सभी पैक्सों में कृषि संयंत्र बैंक स्थापित होंगे। पहले चरण में 2927 पैक्सों में कृषि संयंत्र बैंक स्थापित करने के लिए कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए 439.05 करोड़ की मंजूरी दी गई है। चयनित पैक्सों में से 2023 पैक्सों को 15-15 लाख रुपए जारी कर दिए गए हैं।

विधानसभा में सुधाकर सिंह के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में कृषि मंत्री ने माना कि राष्ट्रीय योजना के तहत 2018-19 व 2019-20 में 16 अरब 92 करोड़ 60 लाख की मंजूरी मिली थी। लेकिन यह राशि नहीं मिल सकी। इसके बाद कोरोना में इस योजना पर असर हुआ। अब सरकार ने मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र पर काम शुरू कर दिया है। पैक्सों को 50 फीसदी अनुदान तो 50 फीसदी कर्ज लेकर बैंक संयंत्र स्थापित करना है। बैंक स्थापित करने को एजेंसियों के चयन की प्रक्रिया शुरू है।

विजय शंकर दूबे के तारांकित प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि सीवान के महाराजगंज में किसानों को इनपुट अनुदान नहीं मिल रहा है तो वरीय अधिकारियों से इसकी जांच कराई जाएगी। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री रामप्रीत पासवान ने अजीत शर्मा के सवाल पर कहा कि राज्य के 14 जिले में आर्सेनिकयुक्त पानी की आपूर्ति हो रही थी। इससे चर्म रोग सहित अन्य बीमारियां होने की आशंका रहती है। नल-जल योजना से लोगों को नल का स्वच्छ पानी दिया जा रहा है। इस योजना को मार्च 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने समीर कुमार महासेठ के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में कहा कि राज्यभर में गील व सूखा कचरा के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाया जाना है। सरकार के सात निश्चय-2 के तहत इस योजना पर काम होना है। इसके बाद गीला व सूखा कचरा का निष्पादन सही तरीके से हो सकेगा।

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